इजरायल-ईरान युद्ध
कंस को या साम्रासुर को या सहस्त्रबाहु से युद्ध करने के लिए जब भगवान कृष्ण गए तो विश्व युद्ध जैसी स्थिति- पेरिस्थित बन गई थी क्योंकि शत्रु बहुत ही बलवान और शैतान था। राम जी द्वारा रावण से युद्ध करने के लिए विश्व युद्ध जैसी स्थिति-परिस्थिति बन गई थी क्योंकि शत्रु बहुत बलवान था और शैतान था। लेकिन मानवता को लंबे समय तक सुरक्षित, विकासशील, सुखी और शांति प्रदान करने के लिए इस तरह के युद्ध लड़ना बहुत आवश्यक था। ठीक उसी प्रकार इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान से युद्ध लड़ना मानवता को लंबे समय तक सुख, समृद्ध और विकासशील तथा सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।
मुझे जिहादियों और आतंकवादियों के बच्चों से बहुत नफरत है क्योंकि उनके बच्चों में से 97% बच्चे जो आपको मासूम दिखते हैं बाद में जिहादी और आतंकवादी
बनेंगे। मुसलमान ने हमेशा जब भी किसी पर आक्रमण किया तो उनके बच्चों को मार डाला या उनका धर्म परिवर्तन कर दिया, महिलाओं को मार डाला या उनका बलात्कार कर दिया।
रावण की वाटिका में हनुमान जी ने फल खाए और पेड़ तोड़ दिए। पेड़ों की रक्षा करने वाले अक्षय नामक रावण पुत्र को भी मार दिया। क्या वह स्थान युद्ध भूमि का क्षेत्र थीं जवाब है नहीं लेकिन लक्षित शत्रु जहां खड़ा हो वही युद्ध भूमि होती है और शत्रु के सेना के साथ उसका साधन नष्ट करना भी उचित है और युद्ध में विजय पाने के लिए युद्ध नीति होती है।
US Support Israel with everything.
अमेरिका भगवान विष्णु की तरह इस पूरी दुनिया में है जो देवताओं की करने के बाद भी क्योंकि देवता राक्षसों की तुलना में बेहतर है उनकी रक्षा के लिए सदैव अंतिम विकल्प के रूप में प्रस्तुत हो जाते हैं।आपको क्या हमदर्दी है ईरान के बच्चों के साथ? ईरान के बच्चे भी कट्टर इस्लामी आतंकवादी और जिहादी हैं बाद में हमास आतंकवादी जिहादी और हूती विद्रोहियों के साथ मिलेंगे या उनका समर्थन करेंगे। लेबनान के साथ मिलकर इजराइल का नाम और निशान मिटाने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे। आपने बकवास पढ़ा है। आपने हिंदुस्तान को सेकुलर मूल्क बनाने के लिए मुसलमान की बनाई गई सिलेबस के आधार पर पढ़ाई की है जो की हिंदुस्तान के हिंदुओं की क्षमता को नीचे पांव के नीचे दबने लायक बनाती है।
ईरान के बच्चों के अंदर मासूमियत कम और जिहादी मानसिकता अधिक है वे बंम लगाकर अपने साथ दूसरों को भी उड़ाना चाहते हैं और इसके लिए वे कहते हैं कि हमने धर्म के लिए शहादत दी है। ईरानी शासन के समर्थक लोग और बच्चे दुनिया भर में कहीं पर भी हो वे सभी मानवता के लिए खतरा हैं। जब हमास, हिज़बुल्ला, हूती आतंकवादियों ने इजराइल में घुसकर 700 से अधिक महिलाओं और बच्चों-बुजुर्गों को बेरहमी से कसाई बनकर मार दिया, अपहरण कर लिया, बलात्कार कर दिया और जब इसराइल ने हमास को करने के लिए युद्ध आरंभ किया तो ईरान ने हमास का साथ लेते हुए इसराइल पर हमला करदिया था अब इसराइल ने अपना बदला लेना शुरू किया है तो आपकी क्यों जल रही है? ईरान और हमास के हमले से इजराइल में महिलाएं और बच्चे बुजुर्ग मारे गए थे तो अब ईरान में भी मरेंगे।
America अमेरिका ने जापान का साथ दिया, यूरोपियन यूनियन का साथ दिया, इजराइल का साथ दिया, ताइवान का साथ दिया,UAE, Saudi Arabia, Quatar, आदि जिन-जिन देशों का साथ अमेरिका ने दिया वे सभी बेशक इसमें कोई संदेह नहीं है कि अमेरिका से थोड़े बहुत पीछे हैं लेकिन, दूसरे देशों की तलना में बहुत से देशों से बहुत अधिक हर क्षेत्र में संपन्न हैं। वास्तव में अमेरिका ने दुनिया में वही भूमिका निभाई है जो भगवान विष्णु जीने अलग-अलग रूप धारण या जन्म लेकर देवताओं और पृथ्वी लोक पर उपकार और रक्षा का कार्य किए हैं।
भविष्य में लंबे समय तक शांति के लिए बहुत बड़ी जोखिम उठानी चाहिए। सियामुसलमान को आतंकवादी बनाने वाले ईरान और सुन्नी मुसलमान को आतंकवादी बनाने वाले पाकिस्तान को हर कीमत पर इस दुनिया से बहुत नीचे धकेलना होगा या नष्ट करना होगा । ठीक है कीमत बढ़ती है तो बढ़ जाने दो। दुनिया में कुछ वर्षों तक भुखमरी से बहुत से लोग मारेंगे कोई बात नहीं लेकिन बहुत अधिक तरक्की करने के बाद यदि जिहादियों, आतंकवादियों ने आतंक फैलाना शुरू कर दिया या मेहनत करने वालों का जीना मुश्किलकर दिया तो सारी तरक्की धरी के धरी रह जाएगी।
मुझे जिहादियों और आतंकवादियों के बच्चों से बहुत नफरत है क्योंकि उनके बच्चों में से 97% बच्चे जो आपको मासूम दिखते हैं बाद में जिहादी और आतंकवादी बनेंगे। मुसलमान ने हमेशा जब भी किसी पर आक्रमण किया तो उनके बच्चों को मार डाला या उनका धर्म परिवर्तन कर दिया, महिलाओं को मार डाला या उनका बलात्कार कर दिया।
लेकिन यदि भारत में मुस्लिम शासक होते या मुस्लिम समर्थक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री होता तब क्या हम इसराइल के लिए अमेरिका के लिए प्यार जताने पर हमें इसराइल और अमेरिका में जाकर रहना चाहिए? और तब क्या हम अपने देश इंडिया से प्यार कर पाते?







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