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आकाश पुत्र और चमत्कारी डांसर - ब्राह्माणडीय संतुलन की कहानी

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  आकाश-पुत्र और चमत्कारी डांसर   (The Sky Warden & The Ocean Dancer) अध्याय 1: दिव्य संतुलन और आकाशीय निवास पृथ्वी की सतह से हज़ारों मील ऊपर, जहाँ बादलों की नीली और सुनहरी परतें आपस में मिलती हैं, वहाँ स्थित था 'स्वर्णिम आकाशीय प्रासाद'। इस आकाशीय महल में निवास करते थे "मास्टर तुलसी यादव", जिन्हें ब्रह्मांडीय शक्तियाँ 'आकाश-पुत्र' (The Sky Warden) के नाम से जानती थीं। सफ़ेद वस्त्रों और भव्य आकाशीय पगड़ी में सुशोभित " मास्टर तुलसी यादव" का जीवन केवल एक ही ध्येय के लिए समर्पित था—पृथ्वी के वायुमंडल की शुद्धता, ऋतु-चक्र और आकाशीय वर्षा का संतुलन बनाए रखना। उनकी दृष्टि जब भी पृथ्वी पर पड़ती, वे उसकी हरियाली और जीवन को देखकर आनंदित होते थे। इसी दिव्य संतुलन का दूसरा स्तंभ थे उनके अनन्य मित्र—'चमत्कारी डांसर' (The Ocean Dancer)। वह एक दूरस्थ शांतिप्रिय ग्रह से आए अत्यंत ऊर्जावान एलियन जीव थे, जिनका परिधान नीले और हरे रंग के दिव्य प्रकाश से चमकता रहता था। चमत्कारी डांसर के पास एक अद्वितीय कला थी—वे अपनी नृत्य मुद्राओं और लयबद्ध पदचाप (Vibrations...

संघर्ष, आस्था और संकल्प: शिवनारायण यादव की जीवन-गाथा

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 संघर्ष, आस्था और संकल्प: शिवनारायण यादव की जीवन-गाथा                                                                         संघर्ष, आस्था और संकल्प: शिवनारायण यादव की जीवन-गाथा "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" जीवन जब सबसे कठिन परीक्षा ले रहा हो, तब केवल दो ही संबल मनुष्य को टूटने से बचाते हैं—महादेव की अटूट भक्ति और श्रीकृष्ण का कर्मयोग। १. कुल का गौरव और संस्कारों की नींव शिवनारायण यादव केवल एक नाम नहीं, बल्कि अपने समाज की आन, बान और मर्यादा के सजीव प्रतीक हैं। अपनी जड़ों, संस्कृति और यदुवंश के गौरवशाली इतिहास का गहरा ज्ञान रखने वाले शिवनारायण जी का संपूर्ण व्यक्तित्व दो दिव्य स्तंभों पर टिका है—एक ओर देवाधिदेव महादेव के प्रति अनन्य समर्पण, जिससे उन्हें विपत्तियों से लड़ने की असीम आत्मशक्ति मिलती है; और दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिपादित 'कर्म की प्रधानता' ...

Discuss🤼 (वाद-विवाद)

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                          दुनिया में विद्यार्थियों को सबसे अधिक काम-चोर क्यों कहते हैं? क्योंकि विद्यार्थियों के पास सबसे अधिक कार्य होते हैं फिर भी सबसे अधिक छुट्टियां विद्यार्थी ही करते हैं और हर-एक छुट्टी की मांग भी करते रहते हैं या कहो तो विद्यार्थी वास्तव में सबसे अधिक लड़ते-झगड़ते और आराम करते रहते हैं। दुनिया में विद्यार्थियों को सबसे अधिक काम-चोर क्यों कहते हैं? क्योंकि विद्यार्थियों के पास सबसे अधिक कार्य होते हैं फिर भी सबसे अधिक छुट्टियां विद्यार्थी ही करते हैं और हर-एक छुट्टी की मांग भी करते रहते हैं या कहो तो विद्यार्थी  वास्तव में  सबसे अधिक लड़ते-झगड़ते और आराम करते रहते हैं। गर्मी अधिक होने पर विद्यार्थियों को छुट्टियां मिल ही जाती है। सर्दी अधिक होने पर विद्यार्थियों को छुट्टियां मिल ही जाती है। हर त्यौहार में विद्यार्थियों को छुट्टियां मिल ही जाती है। संडे या सेकंड सेटरडे या महीने के आखिरी तारीख को लास्ट वर्किंग-डे पर विद्यार्थियों को छुट्टी मिल ही जाती है। छोटे-मोटे बीमारी होने पर या बिमा...

इजरायल-ईरान युद्ध

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  कंस को या साम्रासुर को या सहस्त्रबाहु से युद्ध करने के लिए जब भगवान कृष्ण गए तो विश्व युद्ध जैसी स्थिति- पेरिस्थित बन गई थी क्योंकि शत्रु बहुत ही बलवान और शैतान था। राम जी द्वारा रावण से युद्ध करने के लिए विश्व युद्ध जैसी स्थिति-परिस्थिति बन गई थी क्योंकि शत्रु बहुत बलवान था और शैतान था। लेकिन मानवता को लंबे समय तक सुरक्षित, विकासशील, सुखी और शांति प्रदान करने के लिए इस तरह के युद्ध लड़ना बहुत आवश्यक था। ठीक उसी प्रकार इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान से युद्ध लड़ना मानवता को लंबे समय तक सुख, समृद्ध और विकासशील तथा सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।             मुझे जिहादियों और आतंकवादियों के बच्चों से बहुत नफरत है क्योंकि उनके बच्चों में से 97% बच्चे जो आपको मासूम दिखते हैं बाद में जिहादी और आतंकवादी बनेंगे। मुसलमान ने हमेशा जब भी किसी पर आक्रमण किया तो उनके बच्चों को मार डाला या उनका धर्म परिवर्तन कर दिया, महिलाओं को मार डाला या उनका बलात्कार कर दिया। https://youtu.be/K-nNV5pozqQ?si=XxJUpmYn4QVps6Eo रावण की वाटिका में हनुमान जी ने फल खाए और पेड़ तोड़ दिए...

मैं बालक आप हो माता

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“ मैं बालक आप हो माता ” ममा-मां-मैया,मम्मी-अम्मी जगत जननीं माता। आपके नाम से हमें जो कुछ भी है आता, इन सब में आपसे जुड़ा है हमारा गहरा नाता क्योंकि ब्रह्मा-विष्णु-महेश ने बनाया है हमें आपका बालक और आपको हमारी माता।। आपकी शान में जागूं सारी रात सुनाऊं जगराता।।। कोई करे पसंद,खूब-पसंद और किसी के मन को बिल्कुल भी नहीं भाता, इसमें हमारा कुछ नहीं जाता।।।। कोई सीता के नाम से है पीता-खाता और कोई राम के नाम से है आता-जाता।।।।। ‘उम्र-बीती, युग-बीता जन्म लिया कई बार, स्वभाव-बदली, घर-टूटा, रूठ गया संसार’ ।।।।।। सदैव रहेगा हमारा रिश्ता-नाता क्योंकि हम बालक आप हो माता इसके सिवा हमें कुछ भी नहीं और सब कुछ है आता।।।।।। जीवन को नर्क बनाने के लिए एक जागरूक तरीक़ा द्वारा आप शिक्षित कर रहे हो😢 अच्छे उदाहरण देकर अप्राकृतिक क्रिया करने के लिए उकसाने की शिक्षा दे रही हो।  https://youtu.be/eFnYulEhU2w?si=B5eI7Mp4WDmWelIl अपने जीवन में क्या कोयले को उपयोग में लाना या कोयले की कालिख हाथ-पैर में लग जाना पाप या अपराध है? कोयले के कारखाने में कार्य कर रहे परिश्रमी लोगों को रंडियों या अश्लील व्यभिचारी सेल्फी,...

Holly Safety 🛟 Band(रक्षाबंधन का अनोखा वैश्विक त्यौहार)

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वादों से बांधा मिलने की कितनी? कोशिश करना, धागों से बांधा, एहसास तुमसे मिलने का, मिलना है अपना, ख्वाबों से बांधा, मिलना है अपना, मैं रहूं ना मैं आपके बिना। एहसास तुमसे मिलने का, मिलना है अपना, रब की मोबाइल, मुश्किल है ना मुमकिन नहीं https://educational3012.blogspot.com/2020/08/blog-post.html कहानी : रक्षाबंधन का अनोखा वैश्विक रिश्ता त्यौहार  एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक भाई और बहन रहते थे। उनका नाम था अर्जुन और सिया। अर्जुन अपनी बहन सिया से बेहद प्यार करता था और हमेशा उसके सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता था। सिया भी अपने भाई अर्जुन से बहुत प्यार करती थी और उसकी रक्षा के लिए सदैव प्रयत्नशील थी तथा अपने ईश्वर से प्रार्थना करती रहती थी। हर साल की तरह इस वर्ष भी रक्षाबंधन का त्यौहार नज़दीक आ रहा था। सिया का अनोखा विचार: इस बार सिया ने एक अनोखा विचार किया। उसने सोचा, "मैं सिर्फ अर्जुन को ही राखी नहीं बांधूंगी, बल्कि मैं अपने दादाजी-दादी जी, माताजी-पिताजी के साथ-साथ प्यारे पालतू कुत्ते 'टोफू', गाय की बछिया 'लक्ष्मी' और अपने आँगन के आम के पेड़ को भी राखी बांधूंगी ...