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संघर्ष, आस्था और संकल्प: शिवनारायण यादव की जीवन-गाथा

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                                                           संघर्ष, आस्था और संकल्प: शिवनारायण यादव की जीवन-गाथा "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" जीवन जब सबसे कठिन परीक्षा ले रहा हो, तब केवल दो ही संबल मनुष्य को टूटने से बचाते हैं—महादेव की अटूट भक्ति और श्रीकृष्ण का कर्मयोग। 1. कुल का गौरव और संस्कारों की नींव शिवनारायण यादव केवल एक नाम नहीं, बल्कि अपने समाज की आन, बान और मर्यादा के सजीव प्रतीक हैं। अपनी जड़ों, संस्कृति और यदुवंश के गौरवशाली इतिहास का गहरा ज्ञान रखने वाले शिवनारायण जी का संपूर्ण व्यक्तित्व दो दिव्य स्तंभों पर टिका है—एक ओर देवाधिदेव महादेव के प्रति अनन्य समर्पण, जिससे उन्हें विपत्तियों से लड़ने की असीम आत्मशक्ति मिलती है; और दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिपादित 'कर्म की प्रधानता' के प्रति अडिग निष्ठा। घर के सबसे बड़े भाई होने के नाते उन पर परिवार की धुरी संभालने का दायित्व था। उनके तीन छोटे...