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दिल और दिमाग की दिलचस्पी

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🌳🥦भरपूर हरियाली देती है जरूर खुशहाली यदि मन में भाव हो प्रेम और आकर्षण का तो ऊपर से दिखोगे💐💐 गुलाबी-गुलाबी।। सपने तो मैं भी देखता हूं! हां! लेकिन पूरे होने की आशा करता हूं कोशिश नहीं क्योंकि सारी कोशिश अगर मैं कर दूं तो जिसके लिए सपने देखता हूं वह क्या करेगी? या सपने क्या करेंगे? स्वस्थ-स्वास्थ्य और मन को आरामदायक स्वप्न आने की प्रतीक्षा रहती है। सपनों को निंद्रा की प्रतीक्षा, निंद्रा को नेत्र बंद होने की प्रतीक्षा रहती है🤔 सबसे अजीब है पूरी दुनिया में हाल-चाल इस बार,  आया है “2026” एक खतरनाक🌨️⚡☠️👹 नया साल इस बार,  कहीं पछतावा ना हो हार्दिक स्वागत और प्रसन्नता की यार-प्यार इस बार,  कुछ दिन बीत जाने दो ‘काल-हाल’ इस बार,  फिर बधाई देना चाहे जितनी खुशी से आया “2026” एक खतरनाक☠️👹⚡🌨️ नया साल इस बार।। मौसम मेरा, समय मेरा, समाधान मेरा। विधान-विधाता का, लक्ष्य M.T.G.N का, विकास भारत माता का।। जय हिंद जय श्री राम! पढ़ो-लिखो बनो महान!।। You had a lot of Fun! without a single shot of a Gun 🔫! आपने खूब मज़ा किया! बिना एक भी गोली चलाए! Keep blessings from around the day...

“मुझे भी समझना है”

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  “ मुझे भी समझना है ”   “धेनु से कहना, छेनू बोल रहा हूं, छेद! करने आ रहा हूं” आपको कुछ समझ में आया? «नहीं», मुझे भी नहीं आया। आशा है हम दोनों मिलकर आवाज़ लगाएं «मुझे भी समझना» है । ( 1) क्या? आपको पता है! अपने भविष्य को जानने के लिए हमें अपने स्वरूप को सूक्ष्म बनाना होता है और घटनाओं को जोड़ना होता है तब जाकर हमें भविष्य की योजनाओं का या ईश्वर की योजनाओं का पता चलता है। इसमें हमें यह भी पता चलता है की भूतकाल में यदि हम किसी घटना को बदल भी दें तब भी भविष्य बदला नहीं जा सकता है अर्थात भविष्य की घटनाओं को बदला नहीं जा सकता है यदि वह बीत चुकी है। क्योंकि भूतकाल से लेकर के भविष्य काल तक की दूरी का आकार बहुत बड़ा है और बड़ी चीजों की चाल-चलन(moment) हमें सीधी नजर आती है जबकि भूतकाल की तय की गई सभी दूरियां छोटे-छोटे हिस्सों में कटे होते हैं जिनकी चाल-चलन(moment) हमें टेढ़ी-मेढ़ी(curvature movement) नजर आती है। इसे समझने के लिए क्वांटम(Quantum) फिजिक्स(physics) हमारी मदद करती है। जैसे यदि हम अमेरिका से भारत पहुंच चुके हैं तो इस यात्रा को हम भूतकाल में जाकर पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षि...

Contemporaries तृप्तियां

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  Contemporaries तृप्तियां हमारी दुनिया🌎⚽🥥🥞🎈 गोल हो! चौकोर हो! या त्रिकोण हो! अंडाकार हो! या आलूकार हो! इसका आकर्षण🎡🌞 बल हमें हमारे दुनिया से जोड़कर रखता है। पक्षी या परी अपने पंखों के साथ भी इससे अलग होकर अपना अस्तित्व बचा नहीं सकते। इसे कहते हैं अपने दुनिया से जीवन का संबंध है।   जो खोया-पाया यहीं पर खोया-पाया, जो क़र्ज़ जिसके लिए लिया, उसी के लिए वहीं पर चुकाया। बचपन-पचपन(55) बीता सब एक जैसा, “राम-भरोसे”। आगे होगा जीवन कैसा? इसकी भी चिंता आप करोगे।। हे राम! हे सीता! सूक्ष्म रूप और विशाल सोच-समझ का धन है मेरा मन।  इसकी उपज को बेच-बेच खड़ी कर दूं बहु मंजिला भवन।। “कर भला तो हो भला” रट लगाऊं  आजीवन।।। जो पाया यहीं से पाया जो खोया यहीं पर खोया सफल जीवन का किया हवन।।।। शर्मा-बेशर्मा बनकर संघर्ष किया और अब मृत्यु मिले या मोक्ष अपने सिर पर खुद बांधा कफन।।।।। हमारी सोच ने हमारे प्रथम स्वर्ग रूपी दुनिया को नर्क बना दिया है क्या-जाने कहां-कहां? बताओ आप कुछ भी यहां, पाओ आप कुछ भी यहां किंतु  जो शांति और संतुष्टि तारों में है वो गांव-शहर के यारो-पारो में नहीं है। आ...